भगवान विष्णु के 22 अवतार।

श्रीमद भागवतं के अनुसार भगवान विष्णु के 22 अवतार के बारे में बताया है ।

1. कुमारगण ( ब्रह्मदेव के चार मानस पुत्र )

सृष्टि के प्रारंभ में सर्वप्रथम ब्रह्मा जी के 4 अविवाहित पुत्र हुए सनक, सनन्दन, सनातन और सनतकुमार जिन्होंने आजीवन नैष्ठिक ब्रह्मचर्य का पालन करते हुए भगवान श्री हरी विष्णु की कठोर तपस्या की। इनके बारे मैं जानने के लिए आपको नारद पुराण पढ़ना चाहिए ।

2. वराह अवतार

सृष्टि के प्रारंभ में जब पृथ्वी जल मग्न थी , तब पृथ्वी ने भगवान नारायण से अपने उद्धार के लिए प्रार्थना की । उनकी स्तुति से भगवान नारायण बहुत प्रसन्न हुए , और उनके उद्धार के लिए वराह अवतार लेकर पृथ्वी को समुद्र से ऊपर उठा लिया। वराह (शूकर) का अवतार पृथ्वी को गंदे पदार्थ के रसातल भाग से बाहर निकालना था । गंदी जगह से किसी चीज को बाहर निकालना शूकर का कार्य है।

3. नारद अवतार

ऋषियों के अवतार में भगवान श्री हरी ने देव ऋषि नारद के रूप तीसरा अवतार ग्रहण किया। उन्होंने उन वेदों का भाष्य संकलित किया जिनमे भक्ति मिलती है और जो निष्काम कर्म की प्रेरणा देती है। समस्त योनियों के बड़े-बड़े ऋषि, मुनि, कवि उनके शिष्य थे।

4. नर-नारायण अवतार

भगवान विष्णु के पाँचवे अवतार, भगवान ब्रह्मा के मानस पुत्र धर्म की पत्नी मूर्ति के गर्भ से नर-नारायण दो जुड़वा पुत्रों का जन्म हुआ था। उन्होंने इंद्रियों को वश में करने के लिए बहुत कठिन तपस्या कर धर्म का विस्तार किया।

5. भगवान कपिल मुनि

कपिल मुनि का अवतार भगवान श्री हरी का पंचवा अवतार है , इसमे उन्होंने सृष्टिकारी तत्वों तथा संख्य दर्शन की व्याख्या की , क्योंकि कालक्रम से यह ज्ञान नष्ट हो चुका था।

6. भगवान दत्तात्रेय

ईश्वर के पाँचवे अवतार दत्तात्रेय का जन्म ऋषि अत्री की पत्नी अनुसूईया ने जब ब्रम्हा, विष्णु और भगवान शिव से प्रार्थना की , हे प्रभो ! यदि आप मुझपर प्रसन्न है और मुझे वर देना चाहते है तो मेरी प्रार्थना है आप तीनों मिलकर मेरे पुत्र बने। उन्होंने प्रार्थना स्वीकार की और तीनों भगवान ने दत्तात्रेय के रूप में जन्म लिया और अलर्क, प्रह्लाद, यदु, हैहय आदि को आत्म-दर्शन का उपदेश दिया

7. यज्ञेश्वर अवतार

सवायंभुव मन्वन्तर के मनु और शतरुपा की पुत्री आकूति और प्रजापति रुचि के पुत्र यज्ञ थे। उन्होंने अपनी पुत्री के विवाह से पूर्व ये शर्त रखी की आप दोनों का जो भी पहला पुत्र होगा उसे आप मुझे दे देंगे। इस प्रकार मनु ने यज्ञ को गोद ले लिया, क्यूंकी वह जानते थे की वह भगवान विष्णु के अवतार है। मनु के बदलने पर भौतिक जगत की व्यवस्था बनाए रखने के लिए, यज्ञेश्वर को इन्द्र पद की प्राप्ति हुई ।भगवान यज्ञ ने अपने पुत्रों तथा अन्य देवताओं की सहायता से संसार का शासन संभाला।

8. राजा ऋषभ

राजा ऋषभ भगवान के 8 वे अवतार थे , राजा नाभि तथा उनकी पत्नी मेरुदेवी के पुत्र थे। इस अवतार में भगवान ने आत्म साक्षातकार का मार्ग दिखलाया , यह अवतार उनके लिए था जो भौतिक इंद्रिय-सुखों की खोज में लगे हुए है ।

9. राजा पृथु

राजा पृथु की उत्पत्ति उनके पिता राजा वेन से हुई, राजा पृथु इस दुनिया के पहले राजा हुए उन्ही के नाम पर ही धरती का नाम पृथ्वी पड़ा क्यूंकी उन्होंने ने पृथ्वी को जोत कर उसे उपजाऊ बनाकर खेती की। उन्ही के कारण बंजर धरती हरी-भरी और सुंदर बन गई।

10. मत्स्य अवतार

जब चाक्षुष मन्वन्तर के बाद जलप्रलय हुआ और सर जगत जल में डूब गया था , तब भगवान विष्णु ने मत्स्य अवतार लेकर अपने भक्त राजा सत्यव्रत की नाव की रक्षा कर उन्हे दिशा दिखाई । इसके बाद वैवस्वत मन्वन्तर की शुरुआत हुई और राजा सत्यव्रत उस मन्वन्तर के पहले मनु हुए।

11. कच्छप अवतार

देवासुर संग्राम के बाद जब देवता और असुर श्रीहिन हो गए तब वह सभी भगवान विष्णु के शरण में गए तब भगवान ने उन्हे सागर में छिपी संपदा और उसे प्राप्त करने का उपाय बताया। प्रभु को यह कच्छप अवतार तब लेना पड़ा जब समुद्र के गर्भ में छिपी संपदा प्राप्त करने के लिए देवताओं और असुरों ने समुद्र का मंथन किया उस समय जब मंदराचल पर्वत की रगड़ सहने की शक्ति पृथ्वी में नहीं थी और मंदराचल पर्वत नीचे को धसने लगा तब भगवान एक महान कूर्म के रूप में प्रगट होकर मंदराचल पर्वत को धारण कर देवताओं और असुरों को समुद्र का मंथन करने में मदद की

12. धन्वंतरि

बारहवे अवतार में भगवान धन्वंतरि के रूप में अमृत कलश के साथ समुद्र मंथन से प्रगट हुए थे। वह देवताओं के चिकित्सक थे और आयुर्वेदीक चिकित्सा पद्धति के जनक भी थे ।

13. मोहिनी अवतार

समुद्र मंथन में देवताओं और असुरों को अमृत प्राप्त हुआ, अमृत के प्राप्त होने के बाद देवताओं को डर था की, अमृतपान कर यह असुर अमर न हो जाए । फिर देवताओं ने भगवान विष्णु से अपनी चिंता व्यक्त की और प्रार्थना की , देवताओं की प्रार्थना सुन भगवान ने मोहिनी अवतार लिया। उन्होंने ने अपनी सुंदरता से असुरों को मोहित कर सिर्फ देवताओं को ही अमृत पान कराया ।

14. नरसिंघ अवतार

चौदहवें अवतार में भगवान ने नरसिंघ (आधा मनुष्य आधा सिंह ) अवतार लेकर अपने परम भक्त प्रह्लाद की उनके पापी पिता हिरण्यकशिपु से उनकी रक्षा की ।

15. वामन अवतार

पन्द्रहवें अवतार में भगवान ने बौने ब्राह्मण का अवतार लेकर राजा बलि का उद्धार किया। राजा बलि दैत्यों के राजा थे वह इन्द्र का पद प्राप्त करने के लिए 100 यज्ञों का अनुष्ठान कर रहे थे, उनके 99 यज्ञ पूर्ण होने के बाद जब वह अपना अंतिम यज्ञ करने जा रहे थे तभी वहाँ भगवान विष्णु अपने वामन रूप में उनकी यज्ञ शाला में पहुँच कर उनसे तीन पग भूमि दान में मांगी, तत्पश्चात राजा बलि ने तीन पग भूमि देने का संकल्प लिया। उसके बाद भगवान ने दो ही पग में सारा संसार नाप लिए फिर उन्होंने महाराज बलि से प्रश्न किया , हे राजन! मैंने दो ही पग में सर संसार नाप लिया है अब में अपना तीसरा पग कहा रखू । यह सुनकर राजा बाली ने उत्तर दिया ।

प्रभु! आप अपना तीसरा पग मेरे सिर पर रख मेरा उद्धार कीजिए। इस तरह भगवान विष्णु ने अवतार लेकर राजा बाली का उद्धार किया

16. परशुराम अवतार

सोलहवें अवतार में भगवान ने परशुराम अवतार लेकर इक्कीस बार क्षत्रियों का संहार किया, क्योंकि वह ब्राम्हनों का विरोध कर उन्हे कष्ट पहुंचा रहे थे ।

17. व्यासदेव अवतार

सत्रहवे अवतार में भगवान, पराशर मुनि और सत्यवती के पुत्र श्री व्यासदेव के रूप में प्रकट हुए। उन्होंने वेदों का 4 भागों में विभाजन किया, और धरती के सबसे बड़े महाकाव्य, महाभारत की रचना की। उन्होंने ब्रमहसूत्र , 18 पुरोनो जैसे अनेक ग्रंथों की रचना की । इसी कारण वह भगवान विष्णु के ज्ञान अवतार कहलाये ।

18. श्री राम

अठारवे अवतार में भगवान ने मर्यादा पुरषोत्तम भगवान श्री राम के रूप में जन्म लेकर अत्याचारी राक्षस रावण का वध किया।

19/ 20. श्री कृष्ण और बलराम

उन्नीसवें और बीसवें अवतार में परमात्मा ने यदुकुल में भगवान श्री कृष्ण और बलराम के रूप में जन्म लिया था , श्री कृष्ण अवतार को परमात्मा का पूर्ण अवतार है। इसमे भगवान श्री कृष्ण अपने पूरे ऐश्वर्य और 16 कलाओं को प्रकाशित करते हुए, साधुओं की रक्षा ,दुष्टों का नाश और धर्म की स्थापना करते है।

21. बुद्ध अवतार

कलियुग के शुरुआत में अधिकांश लोग नास्तिक होने लगे थे, वेद मंत्रों और यज्ञों का दुरुपयोग करने लगे थे इसलिए ईश्वर ने अपना इक्कीसवा अवतार बुद्ध रूप में मगध प्रदेश (आज के बिहार प्रदेश के गया शहर ) में अंजना के पुत्ररूप में हुआ था ।

22. कल्कि अवतार

कलियुग के अंतिम समय में भगवान कल्कि अवतार के रूप में जन्म लेंगे। कलियुग में जब सभी लोग पापी, भ्रष्ट और लुटेरे हो जाएंगे, तब कलियुग का अंत होगा और दूसरे युग की शुरुआत होगी ।

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