भगवान विष्णु के अवतार के प्रकार।

1 नित्य अवतार – ज्ञानियों और महात्माओं के रूप में हर समय इस विश्व में अवतरित रहते है। जैसे परशुराम अवतार

2 अंश अवतार – जब ईश्वर अपने आंशिक रूप में अवतरित होते है किसी एक कार्य की पूर्ति के लिए, वह कार्य पूर्ण होते ही वह चले जाते है । मत्स्य अवतार ,वराह अवतार, कच्छप अवतार, वामन अवतार, श्री राम अवतार

3 आवेश अवतार -जब भक्त संकट में हो ,जैसे भागवान के नरसिंघ अवतार ।

4 पूर्ण अवतार – जिसमे परमात्मा अपने पूरे ऐश्वर्य और 16 कलाओं को प्रकाशित करते है। जिस अवतार के द्वारा साधुओं की रक्षा ,दुष्टों का नाश और धर्म की स्थापना के लिए । इन तीनों उद्देश्य को पूर्ण करने के लिए जब भगवान अवतार लेते है तो उन्हे पूर्ण अवतार कहते है। भगवान श्री कृष्ण ही ईश्वर के पूर्ण अवतार है।

सृष्टि के प्रारंभ में, भगवान ने सर्वप्रथम विराट पुरुष के रूप में अपना विस्तार किया और भौतिक सृजन के लिए सारी सामग्री प्रगट की । इस प्रकार सर्वप्रथम भौतिक क्रिया के 16 तत्व उत्पन्न हुए । उन पुरूष ब्रम्हांड के जल के भीतर लौटते ही, उनकी नाभि से एक कमलनाल अंकुरित होता है और इस नाल के ऊपर खिले हुए कमल-पुष्प से ब्रम्हांड के समस्त शिल्पियों के स्वामी ब्रम्हा प्रकट होते है।

16 तत्व इस प्रकार है – 5 पंचमहाभूत (आकाश, वायु, अग्नि, जल और पृथ्वी ) , 5 ज्ञानइंद्रिय ( रूप ,रस गंध,शब्द और स्पर्श ) , 5 कर्मेन्द्रिय- ( हाथ, पैर, मुंह, गुदा और लिंग ) और मन

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